शनिवार, 12 अप्रैल 2008

90 लाख रुपये की ब्रा


लगभग 7,000 माणिकों से जड़ी एक ब्रा और उससे मैच करते हुए हार ने यहां शुरू हुए ट्राइंफ अल्टीमेट सपोर्ट एक्जीबिशन में लोगों का मन मोह लिया। इसकी कीमत लगभग दो लाख 27 हजार डालर [लगभग 90 लाख रुपये] है।
समाचार पत्र द स्टार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 805 ग्राम वजन वाली इस ब्रा में लगभग 7,256 माणिक टांकने में 250 घंटों का समय लगा। अधोवस्त्र बनाने वाली 122 वर्ष पुरानी कंपनी ट्राइंफ ने इस अवसर पर अपना नया लोगो भी जारी किया।
कंपनी के मार्केटिंग निदेशक लिओ सुन हुआत ने कहा,हमें अपना नया लोगो प्रस्तुत करते हुए गर्व का अनुभव हो रहा है। इसका सहज रूप आधुनिक तस्वीर पेश करता है जो हमारे लिए एक नए युग का सूत्रपात है।

..जहां पिटते हैं देवदास

मर्दो द्वारा महिलाओं की पिटाई के कई समाचार सुनने को मिलते हैं, लेकिन देवास जिले में एक ऐसा गांव भी है जहां गांव भर की महिलाएं बगैर छोटे बड़े का लिहाज किए एक दिन मर्दो की जमकर पिटाई करती हैं और मर्द महिलाओं की मार खाकर स्वयं को सौभाग्यशाली समझते हैं।
देवास जिले के आदिवासी बहुल गांव बोरपड़ाव में नवरात्रि के पांचवें दिन विशेष रूप से मर्दो की पिटाई का होता है। इस दिन गांव के चौक पर माता का प्रसाद रखा जाता है, जिसके आसपास महिलाएं वृक्षों की हरी-हरी टहनियों को लेकर खड़ी रहती हैं, जबकि गांव के मर्द टोलियों में प्रसाद लेने आते हैं और महिलाएं दनादन उनकी पिटाई करतीं हैं। गांव वालों का मानना है इस दिन महिलाओं से पिटना सौभाग्य का प्रतीक है। ऐसा ही नजारा हाल ही में देखने को मिला, जब गांव की महिलाओं ने प्रसाद लेने आए मर्दो की टोली की जमकर पिटाई की। मर्दो की इस पिटाई का नजारा देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों की भारी भीड़ इकट्ठा थी।

शुक्रवार, 11 अप्रैल 2008

अमीषा के नखरे


बॉलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल के नखरों की इन दिनों खूब चर्चा है। दरअसल फिल्म ‘भूल भूलैया’ के हिट होने के बाद उन्हें लगता है कि वे अब सुपरस्टार बन गई हैं। अमीषा उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में हैं जिनके करियर की शुरुआत दो सुपरहिट फिल्मों ‘कहो न प्यार है’ और ‘गदर एक प्रेम कथा’ से हुई थी। दोनों ही फिल्मों में वे मुख्य भूमिका में थीं। उन्हें कई अवार्ड भी मिले।

अमीषा मां-बाप के पास लौटेगी? माना जा रहा था कि यह फिल्म अमीषा की डूबती नैया को पार लगा देती। पर अमीषा ने इस फिल्म से बाहर होने का फैसला ले लिया है। उनका मानना है कि फिल्म में उनकी भूमिका अहम नहीं है। वे मानती हैं कि शाहरुख और इरफान के किरदार के आगे वे फीकी पड़ जाएंगी। अब अमीषा को कौन समझाए कि आखिर उन्‍होंने अभी तक ऐसा कौन-सा किरदार निभाया है, जिसकी वजह से दर्शक सिनेमाघरों पर टूट पड़े थे।

जिया का ' जिया'



रामगोपाल वर्मा की खोज कही जाने वाली अभिनेत्री जिया खान की ज्यादा चर्चा उनके नखरों की वजह से ही होती है, लेकिन नि:शब्द के बाद से वे नि:शब्द बैठी हैं। डॉयलॉग नहीं बोल पा रही हैं। दरअसल, उनके पास फिलहाल कोई काम नहीं है और यदि उनकी बीती बातों को भुला दें, तो इन दिनों फिल्मकारों को जिया के एक नए नखरे से दो-चार होना पड़ रहा है। उनके इस नखरे की वजह कोई और नहीं, बल्कि उनका कुत्ता जूलियन है। दरअसल, जिया जूलियन से इस कदर प्यार करती हैं कि वे उससे कुछ पल की जुदाई भी बर्दाश्त नहीं कर पातीं। कहते हैं, यही वजह है कि वे उसे लेकर अपनी फिल्मों के सेट पर भी जाती हैं। सुनने में आया है कि उनका प्यारा कुत्ता जूलियन अगर उनकी नजरों से कुछ देर के लिए भी ओझल हो जाता है, तो वे न केवल परेशान हो जाती हैं, बल्कि उसकी खोज में आसमान सिर पर उठा लेती हैं।
बहरहाल, हम यह बता दें कि आमिर खान की फिल्म गजनी की शूटिंग से वापस लौटीं जिया इन दिनों केन घोष की शाहिद कपूर स्टारर एक अनाम फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं। दरअसल, इसी फिल्म के सेट पर जिया और जूलियन का प्यार चर्चा का विषय बना। जिया अपने कुत्ते जूलियन से इतना ज्यादा प्यार करती हैं, यह किसी को पता नहीं था। जूलियन अगर कुछ वक्त के लिए कहीं चला जाता है और जिया उसे देख नहीं पातीं, तो सारी यूनिट में हलचल मच जाती है। कहते हैं, जब तक वह दिख न जाए, जिया का जिया बेचैन रहता है। यहां तक कि जूलियन को देखे बगैर वे शॉट देने के लिए भी तैयार नहीं होतीं।सच तो यह है कि जूलियन को कोई परेशान करता है, तो जिया उस पर बरस पड़ती हैं। दरअसल, शॉट देने के बाद वे अपना ज्यादा समय जूलियन के साथ ही बिताती हैं। सच कहा जाए, तो जूलियन में जिया की जान बसती है। वैसे, जिया फिल्म इंडस्ट्री की इकलौती कलाकार नहीं हैं, जिनका पालतू कुत्ते के प्रति प्यार चर्चा का विषय बना है। इसके पहले सलमान खान, मिथुन चक्रवर्ती, ओमप्रकाश का उनके पालतू कुत्तों के प्रति प्यार जगजाहिर है। लगता है, जिया भी अब इन लोगों की ही राह पर चल पड़ी हैं। अपने पालतू कुत्ते का खयाल और उसके प्रति बेचैनी तो ठीक है, लेकिन जिया को थोड़ा ध्यान अपनी फिल्मों पर भी देना चाहिए, क्योंकि जब फिल्में चलती हैं, तभी उनके नखरे भी लोग बर्दाश्त कर लेते हैं, वर्ना..!

बुधवार, 9 अप्रैल 2008

कभी खुशी कभी गम नए संवत्सर में

वैसे तो दुनियाभरमें कई संवत् माने जाते हैं, लेकिन भारतीय विक्रम संवत् ही पूर्ण रूप से विज्ञान सम्मत माना जाता है।
हर वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नव विक्रम संवत की शुरुआत होती है। सृष्टि का आरंभ ही इसी दिन से हुआ माना जाता है। सोलह अवतारोंमें से सर्वप्रथम मत्स्यावतार भी इसी दिन हुए थे। नव संवत्सर के शुभारंभ होने के वार को वर्ष का राजा माना जाता है।
इस वर्ष नव संवत्सर 2065का प्रारंभ रविवार के दिन हो रहा है। इसलिए पश्चिमी भारत में इस वर्ष के राजा सूर्य होंगे और पूर्वी भारत में चंद्रमा। नए वर्ष के मंत्री भी सूर्य देव ही रहेंगे। खरीफ की फसल के स्वामी बुध तथा रबी की फसल के स्वामी चंद्रमा होंगे। मेघ [वर्षा], फलों और सेना के स्वामी शनि होंगे। रसीले पदार्थो के स्वामी गुरु, जल और धन के स्वामी मंगल होंगे। आकाशीय ग्रहों की यह मंत्री परिषद् ही पृथ्वी पर आर्थिक, राजनैतिक , सामाजिक तथा अन्य परिस्थितियों को नियंत्रित और प्रभावित करेंगी। राजनैतिक
-राजनैतिक दृष्टि से भारत में इस वर्ष अस्थिरता का माहौल रहेगा। स्वतंत्र भारत का लग्नेश शुक्र वर्ष चक्र में उच्च का है लेकिन नीच का बुध साथ है। अत:राजनेताओं को व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक जीवन में कई आरोप प्रत्यारोप सहन करने पडेंगे तथा वामपंथी विचार वालों को तगडा झटका खाना पडेगा। दक्षिणपंथी दल पहले की अपेक्षा मजबूत होंगे, लेकिन पूर्व की तरह मित्र दलों से जुडे रहेंगे। वामपंथी एवं दक्षिणपंथी दलों के सहयोगी दल भी आपस में खेमे बदल सकते हैं। कुछ ऐसी स्थिति भी बन सकती है जिसमें परस्पर घोर विरोधी दल भी साथ बैठने को मजबूर हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति
-धन का स्वामी मंगल है। नववर्ष की प्रवेश कुंडली में भी मंगल धन स्थान पर है। अत:आर्थिक प्रगति में गति धीमी रहेगी। विदेशी निवेश में बाधा पहुंचेगी, लेकिन वर्षपतिसूर्य एवं चंद्रमा की स्थिति अच्छी होने से बाधाओं के बावजूद भी आर्थिक प्रगति जारी रहेगी। खाद्य पदार्थो एवं खनिज पदार्थो के दाम बेतहाशा बढेंगे। साथ ही वस्त्र व्यवसाय में भी तेजी रहेगी। बहुमूल्य धातुओं में उतार-चढाव इस व्यापार को मंदा करेगा।
शेयर बाजार की स्थिति प्रारंभ में बिगडेगी लेकिन वर्ष के उत्तरा‌र्द्ध में सुधार होगा। रोहिणी निवास संधि में है। अत:अतिवृष्टि एवं खंडवृष्टिरहेगी। अनाज आदि कृत्रिम साधनों पर ज्यादा निर्भर करेंगे, साथ ही भ्रष्टाचार व महंगाई बढेगी। समय का वास वैश्य के घर है। अत:व्यापारी लाभ कमाएंगे। समय का वाहन अश्व होने से प्रजा को लुभाने वाली अनेक योजनाएं घोषित की जाएंगी। पर्यावरण एवं वर्षा
-देश में दो वर्षपतिहोने से पूर्वी और दक्षिणी भारत में वर्षा की अधिकता बाढ जैसी स्थितियां पैदा करेगी। पश्चिमी भारत में भी यत्र-तत्र प्रचंड वर्षा से तबाही होगी, लेकिन कई क्षेत्रों में सूखा भी पड सकता है। मंत्री परिषद में पाप ग्रहों का बोलबाला होने से प्रजा आतंकित रहेगी साथ ही महंगाई की मार को भी झेलेगी।
वर्षा, तूफान, अगिन्कांड,वायु, रेल एवं सडक दुर्घटनाएं अनेक औद्योगिक प्रतिष्ठानों में अगिन्कांडजैसे मामले भी हो सकते हैं। रसीले फल तथा खानपान की अन्य वस्तुएं महंगी हो सकती है। शनि के तीन स्थान औद्योगिक प्रगति के संकेत देता है लेकिन प्रगति धीमी गति से होगी तथा आम लोग परेशान एवं ठगा सा महसूस करेंगे। नववर्ष का राशिफल
-मेष: मित्रों से धोखा मिलेगा, संतान को लेकर चिंता रहेगी, उलझे कार्य सुलझने के आसार बनेंगे, मांगलिक कार्यो पर व्यय होगा। -वृष: खट्टे-मीठे अनुभव होंगे। धीरज से काम बन बनेंगे। स्वास्थ्य को लेकर चिंता रहेगी। आध्यात्मिक उपचार सहायक होगा। -मिथुन: स्वाभिमान की रक्षा के लिए दौड-धूप करनी होगी। परिचितों का सहयोग मिलेगा, व्यापार में बदलाव व बढोत्तरी की योजना बनेगी। -कर्क: कार्यक्षेत्रएवं रिश्तेदारों के चक्कर में धर्मसंकटमहसूस करेंगे। वादा पूरा न होने का गम रहेगा। स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें। -सिंह: उलझने अब कम होगी। यात्रा लाभदायक रहेगी। बुजुर्गो एवं बच्चों की चिंता बनेगी। जीवनसाथी के विचारों से सहमत होने का प्रयास करें। -कन्या: मन उखडा-उखडा रहेगा। घबराएं नहीं। अपने राज छुपा कर रखें। बाहरी उत्साह आपके काम बनवा देगा। अध्यात्म में रुचि बढाएं। -तुला: मौज मस्ती एवं मांगलिक कार्यो में खर्च होगा। -वृश्चिक: वाणी का जादू इस वर्ष रंग दिखाएगा। धन लाभ और मान बढेगा। यात्रा लाभादायीरहेगी। कठोर निर्णय शांति एवं सफलता दे सकते हैं। -धनु: योजनाएं बहुत बनेंगी। मित्रों का सहयोग भी मिलेगा लेकिन लक्ष्य अधूरे रहेंगे। -मकर: मांगलिक कार्यो में धन खर्च होगा। सोचा गया काम पूरा होगा। स्थायी संपत्ति से लाभ होगा। राजनैतिक वर्चस्व बढेगा। -कुंभ: रोजगार के प्रयासों में सफलता की प्रबल संभावना। ऋणमुक्तिमें मित्रों का सहयोग मिलेगा। जीवनसाथी से तकरार में अहं को छोड दें। -मीन: छोटी-मोटी बातें परेशान करेंगी, घबराएं नहीं। नया वर्ष काम बनाने वाला रहेगा।

हाल बुरा बॉक्स ऑफिस का

हाल ही हफ्ते तीन फिल्में रिलीज हुई। तीनों का ही बॉक्स आफिस पर बुरा हाल रहा। किसी भी फिल्म को बीस प्रतिशत से अधिक दर्शक नहीं मिले।
पाकिस्तान से आई खुदा के लिए के प्रति उत्सुकता थी। मुंबई में इसे दर्शक भी मिले। बाकी शहरों में दर्शकों ने अधिक रुचि नहीं दिखाई। इस फिल्म की रिलीज से दर्शक वाकिफ नहीं थे। अगर इस फिल्म का कायदे से प्रचार किया गया होता तो और ज्यादा दर्शक मिल सकते थे। हां, समीक्षकों ने इसे अधिक पसंद किया। इस फिल्म में कोई बड़ा स्टार नहीं था, इसलिए फिल्म को आरंभिक दर्शक नहीं मिले।
शौर्य जैसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं करने के बावजूद होम वीडियो के जरिए दर्शकों के बीच बनी रहती हैं। समर खान को अपनी फिल्म की ऐसी ही मौजूदगी से संतुष्ट होना पड़ेगा। पवन कौल की भ्रम को लेकर दर्शक भ्रमित नहीं रहे। वे सिनेमाघरों में नहीं गए।
अश्वनी धीर की वन टू थ्री भी दर्शकों ने खारिज कर दी। आम तौर पर कामेडी फिल्में औसत व्यवसाय कर लेती हैं, लेकिन इस फिल्म का अनुभव अच्छा नहीं रहा।
अब्बास मस्तान की रेस के दर्शक कम हुए हैं। यह फिल्म बड़े शहरों में अभी तक ठीक-ठाक व्यवसाय कर रही है, लेकिन छोटे शहरों और सिंगल स्क्रीन में फिल्म टिकी नहीं रह सकी।

'आवारा' सर्वाधिक लोकप्रिय


राजकपूर की फिल्म 'आवारा' [1951] को आए साठ साल होने को हैं, लेकिन उसकी टक्कर की कोई फिल्म अब तक नहीं आ सकी है। ब्रिटिश विशेषज्ञों की यही राय है। वे इस फिल्म को 'सर्वाधिक लोकप्रिय सदाबहार फिल्म' का सबसे सटीक दावेदार मानते हैं। ब्रिटिश प्रोफेसर डिना आयोर्डनोवा और कई दूसरे विशेषज्ञों ने यह राय दी है। इन विशेषज्ञों ने कई तथ्य और प्रमाणों के आधार पर एक जर्नल में लिखा है कि 'आवारा' में 'सर्वाधिक लोकप्रिय सदबहार फिल्म' बनने का माद्दा है। 'साउथ एशियन पापुलर सिनेमा' नामक जर्नल के विशेष संस्करण में ब्रिटिश विशेषज्ञों ने भारतीय फिल्मों का लोहा माना है। इसमें दक्षिण एशिया से बाहर के देशों में भारतीय फिल्मों की सफलता पर चर्चा की गई है। आयोर्डनोवा ने कहा कि वह किसी भारतीय से मिलने से पहले ही भारतीय सिनेमा को जानने लगी थीं। उन्होंने कहा, 'मेरे जहन में ऐसी कोई फिल्म नहीं आती जो 'आवारा' से ज्यादा मजेदार हो।'